Ancient History Quiz Part-18 Mcq | Here you can easily solve that topic (2023) | UPSCSITE

By | January 11, 2022

यूपीएससी, यूपीपीसीएस, अन्य राज्य पीसीएस, एनडीए, सीडीएस, सीएपीएफ परीक्षाओं के लिए प्राचीन भारत इतिहास बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी Ancient History Quiz Part-18 Mcq

प्राचीन इतिहास Ancient History Quiz Part-18 Mcq

  • पाषाण काल-✔
  • सैंधव सभ्यता एवं संस्कृति-✔
  • वैदिक काल-✔
  • बौद्ध धर्म-✔
  • जैन धर्म-✔
  • शैव, भागवत धर्म-✔
  • छठी शताब्दी ई.पू.-✔
  • यूनानी आक्रमण-✔
  • मौर्य साम्राज्य-✔
  • मौर्योत्तर काल-✔
  • गुप्त एवं गुप्तकाल-✔
  • प्राचीन भारत में स्थापत्य कला-✔
  • दक्षिण भारत (चोल , चालुक्य, पल्लव एवं संगम युग)
  • प्राचीन साहित्य
  • पूर्व मध्यकाल

Ancient History Quiz Part-18 Mcq (गुप्त एवं गुप्तोत्तर युग)

टोटल प्रश्न- 20

समय- 10 मिनट

“All The Best”

22
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Ancient History Quiz Part-18 (MCq) - हिंदी में

गुप्त एवं गुप्तोत्तर युग (Mcq)

टोटल प्रश्न- 20

समय- 10 मिनट

"All The Best"

1 / 20

341. भारत में दार्शनिक विचार के इतिहास में संबंध में, सांख्य संप्रदाय से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए ?

  1. सांख्य पुनर्जन्म या आत्मा के आवागमन के सिद्धांत को स्वीकार नहीं करता हैं।
  2. सांख्य की मान्यता है कि आत्मज्ञान की मोक्ष की ओर ले जाता है ना कि कोई ब्रम्हा प्रभाव अथवा कारक।

उपयुक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है-

2 / 20

342. निम्नलिखित में से कौन एक 'अष्टांग योग' का अंश नहीं है?

3 / 20

343. केवल प्रत्यक्ष प्रमाण को कौन स्वीकार करता है?

4 / 20

344. अधोलिखित में से कौन एक चावर्क के अनुसार सर्वोच्च मूल्य है?

5 / 20

345. न्याय दर्शन को प्रचलित किया था-

6 / 20

346. निम्न में से किस दर्शन का मत है कि वेद शाश्वत सत्य है?

7 / 20

347. अपूर्व का सिद्धांत संबंधित है-

8 / 20

348. निम्नलिखित युगों में से कौन-सा एक भारतीय षड्दर्शन का भाग नहीं है?

9 / 20

349. लोकायत दर्शन किसको कहा जाता है?

10 / 20

350. अद्वैत दर्शन के संस्थापक है-

11 / 20

351. 'प्रच्छन्न-बौद्ध' किसे कहा जाता है?

12 / 20

352. निम्नलिखित में से अद्वेत वेदांत के अनुसार, किसके द्वारा मुक्ति प्रदान किया जा सकती है?

13 / 20

353. निम्न में से किसका संबंध 'वेदांत दर्शन' के साथ नहीं है?

14 / 20

354. पुराणों के अनुसार, चंद्रवंशीय शासकों का मूल स्थान था-

15 / 20

355. मौखरि शासकों की राजधानी…….थी?

16 / 20

356. 'हर्षचरित' नामक पुस्तक किसने लिखी?

17 / 20

357. नर्मदा नदी पर सम्राट हर्ष के दक्षिणावर्ती अग्रगमन को रोका-

18 / 20

358. चीनी लेखक भारत का उल्लेख किस नाम से करते हैं?

19 / 20

359. निम्नलिखित में से कौन सा 'चार-धाम' में सम्मिलित नहीं है-

20 / 20

प्रचीन भारत में स्थापत्य कला

360. खजुराहो मंदिर स्थापत्य के निर्मित में सहयोगी थे-

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Ancient History Quiz Part-17 Mcq विश्लेषण:-

321. समुद्रगुप्त के ‘प्रयाग प्रशस्ति’ में कोसल के शासक का क्या नाम था?

  1. शिव गुप्त
  2. सोमेश्वर देव
  3. महेंद्र
  4. महिपाल
  5. इसमें से कोई नहीं

उत्तर – 3

प्रयाग प्रशस्ति 19वीं और 20वीं पंक्तियों में दक्षिणापथ के बाहर राज्यों तथा उनके राजाओं के नाम मिलते हैं। प्रयाग प्रशस्ति से ज्ञात होता है कि कौसल का राजा महेंद्र था। दक्षिणापथ के राज्यों को समुन्द्रगुप्त ने पहले जीता किंतु फिर ‘ग्रहणमोक्षानुग्रह’ नीति के तहत कृपा कर उन्हें स्वतंत्र कर दिया।

322.समुद्रगुप्त के प्रयाग प्रशस्ति वाले स्तम्भ पर निम्नलिखित में से किसका लेख मिलता है?

  1. जहांगीर
  2. शाहजहां
  3. औरंगजेब
  4. दारा शिकोह

उत्तर – 1

प्रयाग प्रशस्ति समुन्द्रगुप्त के विषय में जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसकी रचना समुन्द्रगुप्त के संधिविग्रहिक सचिव हरिषेण ने की थी। कनिंघम के मतानुसार यह लेख मुलतः कौशांबी के खुदवाया गया था। अकबर ने इसे कौशाम्बी से मंगाकर इलाहाबाद के किले में स्थापित करवाई। इस पर है जहांगीर का एक लेख, रानी का अभिलेख एवं अशोक द्वारा कौशाम्बी के महामात्रों को संघ भेद रोकने के लिए निर्देश भी उत्कीर्ण है।

323.’पृथिव्या प्रथम वीर’ उपाधि थी-

  1. समुद्रगुप्त की
  2. राजेंद्र प्रथम की
  3. अमोघ वर्ग की
  4. गौतमीपुत्र शातकर्णी की

उत्तर – 1

इतिहासकार तेज राम शर्मा ने अपनी पुस्तक ‘ए पॉलिटिकल हिंदी ऑफ द इम्पीरियल गुप्ताज’ में उल्लेख किया है कि समुद्रगुप्त ने अवश्मेघ यज्ञ किया। जिसके बाद उसने ‘पृथिव्या प्रतिरथ’ की उपाधि ग्रहण की, जिसका अर्थ है- ‘ऐसा व्यक्ति जिसका पृथ्वी पर कोई प्रतिद्वंद्वी’ ना हो।

324.किस अभिलेख से ज्ञात होता है कि स्कंदगुप्त ने हूणों को पराजित किया था?

  1. भीतरी स्तंभ लेख
  2. इलाहाबाद स्तंभ लेख
  3. मंदसौर अभिलेख
  4. उदयगिरि अभिलेख

उत्तर -1

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में सैदपुर तहसील में भीतरी नामक स्थान से भीतरी स्तंभ लेख मिलता है। इसमें पुष्यमित्र और हूणों के साथ स्कंद गुप्त के युद्ध का वर्णन मिलता है। उल्लेखनीय है कि हूणों का पहला भारतीय आक्रमण गुप्त सम्राट स्कंद गुप्त के शासनकाल में हुआ, जिसमें वह स्कंदगुप्त से बुरी तरह पराजित हुए थे।

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325.’शक-विजेता’ किसे जाना जाता है?

  1. चंद्रगुप्त प्रथम
  2. समुद्रगुप्त
  3. चंद्रगुप्त द्वितीय
  4. कुमार गुप्त

उत्तर – 3

गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य को ‘शक विजेता’ कहा गया है। पश्चिम भारत के अंतिम शक राजा रुद्र सिंह III चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ ने पांचवी सदी के प्रथम दशक में परास्त कर पश्चिमी भारत में शक सत्ता का उन्मूलन किया था।

326.रजत सिक्के जारी करने वाला प्रथम गुप्त शासक था-

  1. चंद्रगुप्त प्रथम
  2. समुद्रगुप्त
  3. चंद्रगुप्त द्वितीय
  4. कुमारगुप्त

उत्तर – 3

रजत सिक्के जारी करने वाला प्रथम गुप्त शासक चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ था। जिसको गुप्त काल में (रूप्यक’ (रूपक) कहा जाता था।

327.गुप्त काल में उत्तर भारतीय व्यापार निम्नलिखित में से किस बंदरगाह से संचालित होता था?

  1. भरूच
  2. कल्याण
  3. खंभात
  4. ताम्रलिप्ति

उत्तर – 4

ताम्रलिप्ति गुप्त काल में उत्तर भारतीय व्यापार का प्रमुख बंदरगाह था। ताम्रलिप्ति आधुनिक पश्चिमी बंगाल के मिदनापुर जिले में स्थित है।

328.विशाखदत्त के प्राचीन भारतीय नाटक मुद्राराक्षस की विषय वस्तु है-

  1. प्राचीन हिंदू जनश्रुति के देवताओं और राक्षसों के बीच संघर्ष के बारे में
  2. एक आर्य राजकुमार और एक कबीली महिला की प्रेम कथा के बारे में
  3. दो आर्य कबीलों के बीच सत्ता के संघर्ष की कथा के बारे में
  4. चंद्रगुप्त मौर्य के समय में राज दरबार की दुर्भिसिन्धियों के बारे में

उत्तर – 4

डॉ. के.पी. जायसवाल ने विशाखदत्त को चंद्रगुप्त मौर्य का समकालीन बताया हैं। उनके नाटक मुद्राराक्षस से चंद्रगुप्त मौर्य ने कृत्यों पर प्रकाश पड़ता है। इसमें चंद्रगुप्त मौर्य के समय में राजदरबार की दुर्भिसिन्धियों का वर्णन किया गया है।

329.लीलावती के लेखक थे-

  1. महावीराचार्य
  2. हेमंत चंद्राचार्य
  3. भास्कराचार्य
  4. कालकाचार्य

उत्तर – 3

‘लीलावती’ की रचना प्रसिद्ध भारतीय गणितीय और खगोलशास्त्री भास्कर आचार्य ने की थी। यह गणित विषय का महत्वपूर्ण ग्रंथ है और संस्कृत भाषा में काव्यात्मक शैली में श्लोकबद्ध हैं। वस्तुतः लीलावती भास्कराचार्य द्वारा रचित ग्रंथ ‘सिद्धांत शिरोमणि’ का एक भाग है।

330.भारतीय आत्मा में ‘फाह्यान’ ने एक अस्पताल का उल्लेख किया है यह स्थित था-

  1. उज्जैन
  2. कौशांबी
  3. ताम्रलिपि
  4. पाटलिपुत्र

उत्तर – 4

चीनी यात्री फाह्यान गुप्त काल में भारत आया था। उसने उल्लेख किया है कि पाटलिपुत्र नगर में धनीको ने एक बड़े अस्पताल की स्थापना की थी, जहाँ निर्धनों को निशुल्क दवाएं और भोजन उपलब्ध कराया जाता था। यहां देशभर के रोगी इलाज के लिए आते थे।

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331.चंद्रगुप्त के नौ रत्नों में से निम्न में से कौन फलित-ज्योतिष किससे संबंधित था?

  1. वररुचि
  2. शंकु
  3. क्षपणक
  4. अमर सिंह

उत्तर – 3

चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के कुशल शासन की प्रशंसा चीनी यात्री फाह्यान ने भी की है। इनके नवरत्नों की प्रसिद्धि सर्वकालीक रही है। नवरत्नों में सर्वोत्कृष्ट महाकवि कालिदास थे। जबकि क्षपणक रत्न फलित ज्योतिष थे।

332.इनमें से किसने पहली बार यह व्याख्या की थी कि पृथ्वी ने अपनी धुरी पर घूमने के कारण प्रतिदिन सूर्योदय एवं सूर्यास्त होता है?

  1. आर्यभट्ट
  2. भास्कर
  3. ब्रह्मगुप्त
  4. वराहमिहिर
  5. उपरोक्त में से कोई नहीं/उपयुक्त में से एक से अधिक

उत्तर – 1

आर्यभट्ट गुप्तकाल के प्रसिद्ध गणितज्ञ थे। इनकी प्रमुख कृति ‘आर्यभट्टिय’ है। इन्होंने गणित की विविध नियमों का प्रतिपादन किया तथा सर्वप्रथम खोज की कि पृथ्वी अपनी धुरी के चारों और परिभ्रमण करती है।

333.निम्नलिखित में से किस गुप्त शासक ने सर्वप्रथम सिक्के जारी किए?

  1. चंद्रगुप्त प्रथम प्रथम ने
  2. घटोत्कच ने
  3. समुद्रगुप्त ने
  4. श्री गुप्त ने

उत्तर – 1

गुप्त शासकों में चंद्रगुप्त प्रथम द्वारा सर्वप्रथम सिक्के जारी किए गए। चंद्रगुप्त प्रथम के पूर्व के शासकों, श्री गुप्त एवं घटोत्कच द्वारा सिक्के जारी करने का कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। समुंद्र गुप्त द्वारा भी कई प्रकार के सिक्के जारी किए थे, परंतु इसका काल चंद्रगुप्त प्रथम के बाद का है।

334.सती प्रथा का प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य प्राप्त हुआ है-

  1. एरण से
  2. जूनागढ़ से
  3. मंदसौर से
  4. सांची से

उत्तर – 1

सती प्रथा का प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य एरण से प्राप्त हुआ है। यह अभिलेख 510 ई. का हैं, जिसमें गोपराज नामक सेनापति की स्त्री के सती होने का उल्लेख है।

335.किस प्रकार की भूमि को ‘अप्रहत’ कहा जाता था?

  1. बिना जोती हुई जंगली भूमि
  2. सिंचित भूमि
  3. घने जंगल वाली भूमि
  4. जोती हुई भूमि
  5. उपरोक्त में से कोई नहीं/उपरोक्त में से एक से अधिक

उत्तर – 1

वह भूमि जिसे जोता ना गया हो, उसे अप्रहत भूमि कहा जाता था। यह गुप्तकालीन राजस्व व्यवस्था का एक पद है।

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336.गुप्त साम्राज्य द्वारा निम्न में से किन्हें कर रहित कृषि भूमि प्रदान की जाती थी?

  1. सैन्य अधिकारियों को
  2. सिविल अधिकारियों को
  3. ब्राह्मणों को
  4. दरबारियों विद्वानों को

उत्तर – 3

गुप्त काल में मंदिरों एवं ब्राह्मणों को जो भूमि दान में दी जाती थी, उसे ‘अग्रहार’ कहा जाता था। ऐसी भूमि सभी प्रकार के करों से मुक्त होती थी तथा इनके ऊपर धारकों का पूर्ण स्वामित्व होता था। इस प्रकार के भूमिदान का एकमात्र उद्देश्य धार्मिक एवं शैक्षणिक था।

337.निम्नलिखित में से किसने हूण शासक मिहिरकुल को पराजित किया था?

  1. बुद्धगुप्त
  2. यशोधर्मन
  3. शंशाक
  4. प्रभाकर वर्धन

उत्तर – 2 

चीनी यात्री हेनसांग तथा मंदसौर लेख के साक्ष्य से ज्ञात होता है कि सर्वप्रथम गुप्त नरेश नरसिंह गुप्त बालद्वित्व तत्पश्चात मालवा नरेश यशोधर्मन द्वारा मिहिरकुल को बुरी तरह पराजित किया गया था।

338.चीनी तीर्थयात्री जिसने छठी शताब्दी में भारत दर्शन किया-

  1. यूआन च्वांग
  2. फाहियान
  3. सुंग-यून
  4. आइजिंग

उत्तर – 3

चीनी यात्री सुंग-युंग 518 ई. में भारत आया और उसने अपनी तीन वर्ष की यात्रा में बौद्ध धर्म की प्रतियां एकत्रित की।

338.गुप्त काल के दौरान भारत में बलात श्रम (विष्टि) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. इससे राज्य के लिए आय का एक स्रोत, जनता द्वारा दिया जाने वाला एक प्रकार का कर माना जाता था।
  2. यह गुप्त साम्राज्य के मध्य प्रदेश तथा कठियावाड़ क्षेत्रों में पूर्णतः अविधमान था।
  3. बलात श्रमिक साप्ताहिक मजदूरी का हकदार होता था।
  4. मजदूर के जेष्ठ पुत्र को बलात श्रमिक के रूप में भेज दिया जाता था।

उत्तर- 1

चंद्रगुप्त द्वितीय के उदयगिरि गुहलेख, प्रभावती गुप्त के रिद्धपुर अभिलेख समेत अनेक गुप्तकालीन अभिलेखों में विष्टि (बेगार, बलात श्रम) को अन्य करों के साथ रखा गया है। यद्द्पि बेगार प्रथा का प्रमाण मौर्य युग से ही मिलता है, किंतु गुप्त काल में वह विभिन्न अवसरों पर राजा द्वारा प्राप्त किए जाने वाले कर का एक रूप बन गया था।

इसके तहत मजदूरों, शिल्पियों एवं कृषकों को अनिवार्य रूप से राजा या राज्य के लिए श्रम करना ही होता है, जिसके बदले उन्हें कोई भुगतान नहीं दिया जाता था। बेगार की यह प्रथम मध्य प्रदेश और काठियावाड़ में सबसे ज्यादा प्रचलित थे। बेगार की यह प्रथा पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती थी, किंतु इसमें ज्येष्ठ उतराधिकार जैसा नहीं था, यह सभी श्रमिक पर लागू होती थी।

340.रूद्रक द्वारा लिखी हुए प्राचीन भारतीय पुस्तक ‘मृच्छकटिकम’ का विषय था-

  1. एक धनी व्यापारी और एक गणिका की पुत्री की प्रेम-गाथा
  2. चंद्रगुप्त II की पश्चिमी भारत के शक क्षत्रपों पर विजय
  3. समुद्रगुप्त के सैन्य अभियान तथा शौर्यपूर्ण कार्य
  4. गुप्त राजवंश के एक राजा तथा कामरूप की राजकुमारी की प्रेम-गाथा

उत्तर – 1

शूद्रक कॄत ‘मच्छकटिकम’ नामक रचना से गुप्त कालीन शासक व्यवस्था एवं नगर जीवन के विषय में रोचक सामग्री मिलती है। इससे तत्कालीन समाज में होने वाले परिवर्तनों का प्रकाश पड़ता है। यथा- इससे पता चलता है कि उज्जयनी में कुछ शुद्र अधिकारी थे, अब उन्हें महाकाव्यों एवं पुराणों के श्रवन का अधिकार भी मिल गया था।वस्तुतः इस ग्रंथ में चारुदत्त नामक ब्राह्मण सार्थवाह एवं एक गणिका का की पुत्री वसंतसेना की प्रेम-गाथा को शब्दों का रूप दिया गया है।

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