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Bhagat Singh Quotes | 28 Sep: Moral Thoughts, Life Ideals Of Great Men | UPSCSITE

Bhagat Singh Quotes
Written by upscsite

भगत सिंह के नैतिक विचार व उनके जीवन आदर्श (Bhagat Singh Quotes) का विश्लेषण।

जन्म – 28 सितंबर 1907

मृत्यु – 23 मार्च 1931

भगत सिंह के अनमोल विचार (Bhagat Singh Quotes)

-कवि, प्रेमी और पागल एक ही सामान से बने होते हैं

-राख का प्रत्येक कण मेरी आग से ऊर्जावान है में एक ऐसा पागल आदमी हूँ जो जेल में रहकर भी आजाद है।

-अगर बहरे भी सुन रहे तो ध्वनि बहुत जोर दार हो गयी है। जब बम हमने गिराया तब हमारा इरादा किसी को मारने का नही था। हमने ब्रिटिश सरकार पर बमबारी की थी । अंग्रजो को अवश्य भारत छोडना चाहिये और इसे आजाद करना चाहिये।

-अपने किसी शाब्दिक अर्थ में क्रांति शब्द की विवेचना नही करनी चाहिये । विभिन्न अर्थ और महत्व में इस शब्द को जिम्मेदार ठहराया जाता है । यह लोगो के उपर निर्भर करता है कि कौन इसका उपयोग करता है और कौन दुरुप्रयोग ।

-क्रांति में जरुरी नही कि खूनी संघर्ष सामिल हो । यह केवल बम और पिस्तोल का मार्ग नही था ।

-लोग सामान्यत माहोल जैसा है उसके वैसे ही अभ्यस्त हो जाते है और बदलाव के एक विचार पर कांपना शुरु कर देते है। ऐसी निष्क्रियता की इच्छा को क्रांतिकारी भावना में बदलने की जरुरत होती है ।

-कोई भी आदमी जो प्रगति में खडा है। उसे प्रत्येक नास्तिक तथा पुराने अंधविश्वास को चुनौती देनी होगी ।

-मै इस बात पर बल देता हुं कि मैं आशा, महत्वाकांक्षा, और जीवन के पुरे आकर्षण से भरा हूँ । लेकिन में जरुरत के समय इन सभी का त्याग कर सकता हूँ , यही वास्तविक देशभक्ति है ।

-अंहिसा आत्मबल के सिद्धात पर चलती है जिसमें पीडा प्रतिदंद्धी पर जीत की चाह में सहा जाता है । लेकिन तब क्या होगा जब इस तरह के प्रयास लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल हो जाये। तब आत्म बल को शारिरिक बल के साथ जोडना पडता है। ताकि हम अत्याचारी और क्रूर दुश्मन के दया पर निर्भर न रहे ।

-हर कीमत पर शक्ति का प्रयोग न करना काल्पनिक है और नए आंदोलन जो देश में आरम्भ हुये है जिसकी चेतावनी हम दे चुके है जिसके आदर्श गुरु गोविन्द सिंह, शिवाजी कमाल पाशा , राजा खान, वाशिंगटन , गैरीबाल्डी , लाफयेट और लेनिन है ।

-मनुष्य केवल तब ही कार्य करता है जब वह अपने औचित्य के बारे में दृढ हो। जैसा कि हम विधान सभा में बम फेकने को लेकर दृढ थे ।

-लोगो को कुचल कर वह विचारो को नही मार सकते ।

-कानून की पवित्रता को केवल तभी तक बरकरार रखा जा सकता है जब तक कि यह लोगो की इच्छा की अभिव्यक्ति करता रहे ।

-क्रांति मानव जाती का अविच्छेदय अधिकार है। स्वतंत्रता सभी का एक अविनाशी जन्म सिद्ध अधिकार है और श्रम समाज के असली निर्वाहक है ।

-क्रांतिकारी सोच के दो महत्वपुर्ण गुण बेरहम आलोचना और स्वतंत्र सोच है ।

-में एक मनुष्य हूं और सभी कुछ जो मानव जाति को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है ।

-जीवन केवल अपने दम पर ही जीवन रहता है। दूसरो के कंधे तो केवल अंतिम संस्कार में काम करते है ।

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